शुक्रवार, 2 सितंबर 2016

मेरे वोट का अर्थ

मेरे वोट का ये अर्थ नहीं कि तुम्हारे कर्मों का गुणगान करूँ.. जबरजस्ती तुम्हारे हर कदम में एक सार्थकता साकार करू.. तुम बेहतर लगे थे.. मैंने तुम्हारी त्रुटियों को छुपाने के लिए नहीं उन्हें बताने के लिए वोट दिया है.. मुझे डर नहीं है कि जो वोट मैंने ढिंढोरा पीट के दिया था, आज उसी सरकार के बारे में कुछ प्रतिकूल कहूँ तो लोग क्या कहेंगे.. वो लोग क्या कहेंगे जिन्हें मैंने 16 मई को पूरे दिन फेसबुक में टैग करके चिढ़ाया था.. मेरे वोट की जवाबदेही सिर्फ मेरी है और मेरे प्रति है.. बसीठ सिंह अहीर और राधे पासवान मेरी वर्तमान सरकार के लिए दी गयी प्रतिक्रिया का स्नैपशॉट खींच के पुरानी वाली के साथ तुलना करेंगे यही न? करने दो.. पर मेरे वोटर होने का आशय ये नहीं कि वोट देके मैं आँखों में पट्टी बाँध लूँ.. मैं टैक्स देता हूँ.. देश चलाने में मेरी परोक्ष ही सही परंतु सक्रीय जिम्मेवारी है.. मेरे साल भर के टैक्स की रकम से कहीँ तीन परिवारों को पूरे साल भर का अंत्योदय अनाज मिलता है.. या यूपी का कोई पंजीकृत बेरोजगार उस पैसे से पूरे दो साल अपनी पल्सर की टंकी फुल करा रहा होगा.. या बीस एकड़ की जमीन पे किसान सब्सिडीकृत यूरिया का छिड़काव करते होंगे.. किसे पता क्या हो रहा होगा.. या वो पैसा किसी ठेकेदार की बचत बन के नीचे से ऊपर तक कितने ही हुक्ममरानों का बिस्तर गर्म कर रहा होगा किसे पता?
इतना पॉलिटिकली बायस्ड भी न हो जाओ कि अपने ही द्वारा चुने लोगों की कमियों को बताने भर का पुरुषार्थ भी शेष न रहे.. वरना अगली बार भी चौराहों पे सेम नारे लगाते नज़र आओगे, बस पोस्टरों में चेहरे बदले रहेंगे.. भक्त होना अच्छी बात है पर बीच बीच में कान खींच दिया करो..

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