मंगलवार, 27 सितंबर 2016

जिंदगी के फंडे

जिंदगी के फंडे उस दिन क्लियर हो जाते हैं, जिस दिन किसी देह का पोस्ट मोर्तेम होता देख लो, स्वाद की दीवानी जीभ शांत रहती है.. भोजन का संचय करती वही कुछ अंतड़ियाँ निष्ठुर सी जो बाहर निकाल दी जाती हैं, आज-कल-कैरियर-बैंक-बैलेंस से अनभिज्ञ ठगा सा मृत मष्तिस्क, जो अपने जीवन में हमे हर पल मारे रहता है.. संवेदनाओं से परे रक्त का एक पम्पिंग सिस्टम, दिल, जिसने पूरी जिन्दगी आपका चुतिया काटा होता है.. बस इतना सा ही.. सब एक हमाम में नंगे हो जाते हैं उस दिन.. फिर एम्बाल्मिंग होती है.. ढांचा सिल दिया जाता है.. अपने अपने तरीके से उस ढाँचे से निपट लिया जाता है.. फिर वही पांच तत्व शेष रह जाते हैं..


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